मंगलवार, 8 जनवरी 2013

नया साल

कल तुमसे पूछा था,
नया क्या है?
तुमने मुझे देखा,
पूरे घर को देखा,
और बढ़ा दी ऊँगली,
दीवार पर टंगे कैलेंडर की ओर,
मैंने फिर तुम्हे देखा,
कुछ कहना चाहा,
और तुम्हारी आँखों से एक आंसू,
चुपके से मेरी मुठ्ठी में आकर बंद हो गया,
दीवाल की सीलन,
बाहर की ठंढ,
बिस्तर की सिलवटें,
सब कुछ तो पुराना ही था,
पर कैलेंडर वाकई नया था,
सच में,
और सुख चुका था तुम्हारा आंसू भी,
मेरी बंद मुठ्ठी में,
क्यूंकि तुम और मैं,
समझ चुके थे शायद,
"
नया साल" आ गया है।

-नीरज

0 टिप्पणी:

एक टिप्पणी भेजें

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
 

Me and my thoughts © 2013