मेरी छुटकी,
छै साल की हो गई,.
समय पर लगा के उड़ता रहा,
और तुम सफ़ेद घोड़े को पकडे उडती रही,
लकड़ी की काठी का वह घोडा,
और घोड़े पर बैठी,
सुहानी,
अब जब आँखों में देखती है,
तो,
दाढ़ी औए सिर के पके बाल,
अनायास ही,
और पके दिखने लगते हैं,
झुर्रियां सी महसूस होने लगती हैं,
और बुढ़ापा आँख मिलाने लगता है,
फिर कहता हूँ,
"गुडिया बड़ी हो रही है"
और वो आँखों को मीच कर कहती है,
"मेरे बर्थ डे पर आ रहे हो ना बड़े चाचू?"
आँखों के कोने थोड़े नम हो जाते हैं,
और इससे पहले कि मैं कुछ कहूँ,
वह फिर कहती है,
"अपने बॉस का नंबर दो, बात करनी है"
और आँखें छलछला उठती है बिटिया,
जी करता है तुझे अभी गोद में उठा लूँ,
और चिपका के रो लूँ मन भर,
लेकिन फ़ोन के भीतर घुस कर,
आवाज़ के कणों की तरह
मैं तुझ तक नहीं पहुँच सकता,
समय के साथ कितना कुछ बदल जाता है,
कितना कुछ पहुँच से परे हो जाता है,
देखो ना,
छत से दीखता लाल सूरज,
अब काला होता जा रहा है,
क्षितिज में समाता हुआ,
और उपर आसमान में मैं तुम्हे खोजने की
नाकाम कोशिश में लग गया हूँ,
कहते हैं बहुत याद आने पर आकाश को देखना चाहिए।
- नीरज
छै साल की हो गई,.समय पर लगा के उड़ता रहा,
और तुम सफ़ेद घोड़े को पकडे उडती रही,
लकड़ी की काठी का वह घोडा,
और घोड़े पर बैठी,
सुहानी,
अब जब आँखों में देखती है,
तो,
दाढ़ी औए सिर के पके बाल,
अनायास ही,
और पके दिखने लगते हैं,
झुर्रियां सी महसूस होने लगती हैं,
और बुढ़ापा आँख मिलाने लगता है,
फिर कहता हूँ,
"गुडिया बड़ी हो रही है"
और वो आँखों को मीच कर कहती है,
"मेरे बर्थ डे पर आ रहे हो ना बड़े चाचू?"
आँखों के कोने थोड़े नम हो जाते हैं,
और इससे पहले कि मैं कुछ कहूँ,
वह फिर कहती है,
"अपने बॉस का नंबर दो, बात करनी है"
और आँखें छलछला उठती है बिटिया,
जी करता है तुझे अभी गोद में उठा लूँ,
और चिपका के रो लूँ मन भर,
लेकिन फ़ोन के भीतर घुस कर,
आवाज़ के कणों की तरह
मैं तुझ तक नहीं पहुँच सकता,
समय के साथ कितना कुछ बदल जाता है,
कितना कुछ पहुँच से परे हो जाता है,
देखो ना,
छत से दीखता लाल सूरज,
अब काला होता जा रहा है,
क्षितिज में समाता हुआ,
और उपर आसमान में मैं तुम्हे खोजने की
नाकाम कोशिश में लग गया हूँ,
कहते हैं बहुत याद आने पर आकाश को देखना चाहिए।
- नीरज
7 टिप्पणी:
इस पोस्ट की चर्चा आज सोमवार, दिनांक : 21/10/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक -31पर.
आप भी पधारें, सादर ....नीरज पाल।
बहुत सुंदर ! नीरज जी .
हार्दिक आभार राजीव जी।
बहुत ही बेहतरीन .....
हार्दिक आभार रंजना जी।
बेहतरीन .....
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