एक सनसनी,
एक लड़की,
निर्वस्त्र,
ब्लर्ड चेहरा,
छाई हुई है हर न्यूज़ चैनल पर................।
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कल रात,
शहर के एक मुख्य चौराहे पर,
वह खड़ी थी,
कहीं से आई हुई थी,
बस ने उसे उसके गंतव्य तक पहुँचाने का जिम्मा पूरा कर दिया था,
रात के उस पहर पर,
खाली था वह चौराहा,
सूनसान सड़क के एक कोने पर पसरा हुआ था
पुलिसिया हवलदार,
पुलिस वैन के अन्दर कुछ लोग बैठे गप्पें लड़ा रहे थे,
और एक कोने पर थी चाय की एक दुकान,
जहाँ गुम हो जाती थी,
बल्ब की पीली रोशनी,
धुएं के गुबार में,
वह कुछ देर तक खड़ी रही,
कुछ ऑटो वाले आये लेकिन,
उसे जहाँ जाना था,
वे तैयार नहीं हुए और बढ़ गए,
किसी और सवार की तलाश में,
जो उनकी मुठ्ठियाँ गरम कर सके,
उनके हिसाब से,
वह कर भी क्या सकती थी,
सिवाय इंतज़ार के,
जब कुछ उचक्कों ने घेर लिया उसे,
भद्दे भद्दे जुमले तो वह झेल भी लेती चुपचाप,
लेकिन जब उनमे से एक ने पकड़ना चाहा उसे,
तो वह रोक न सकी अपने आपको,
उठ गया उसका हाथ,
और फिर वह हुआ जो नहीं होना चाहिए था,
खींच ली गयी वो,
चौराहे के एक कोने में,
उसकी चीखें गूंजती रही,
रात के उस पहर में,
चाय वाले की दुकान, सोते हुए हवालदार की कुनमुनायी आँखों,
औए पुलिस वैन के अन्दर बैठे लोगों के बहरे कानों में,
और पता नहीं कब किसने बना डाली उसकी यह फिल्म,
वह लुटती रही रात भर,
सुबह पुलिस ने उसे अस्पताल भेज कर,
पूरी कर ली अपनी तहकीकात,
उसकी फिल्म भी सारे न्यूज़ चैनलों के पास पहुँच गयी,
और फिर सनसनी फ़ैल गयी हर गली मोहल्ले में,
टी आर पी दनादन बढ़ गयी,
समाज जग गया,
लेकिन देख रहा है,
उसे लुटता हुआ,
हर न्यूज़ चैनल पर,
समाज का हर शख्स,
कुछ चरित्र प्रमाण पत्र अपने आप मिल गए उसे,
लेकिन उसका क्या दोष था,
जो यूँ सनसनी बन गयी?
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खोज रही है पुलिस अब भी,
उसके गुनाहगार,
रात की उस सनसनी के ज़िम्मेदार,
क्या वह हवालदार,
पुलिस वैन में बैठा पुलिस ऑफिसर,
चाय वाला,
या फिर हर गुजरने वाले ने,
सुनी न होगी उसकी गुहार?
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सब शांत हैं,
ज़िम्मेदार कौन है,
उसे लूटने वाले,
या फिर उसे लुटते देखने वाले,
या फिर उसकी फिल्म दिखाने वाली मीडिया,
या फिर उसकी फिल्म देखने वाला हर आदमी,
कौन ज़िम्मेदार है?
यह प्रश्न यक्ष की तरह खड़ा है?
यक्षप्रश्न!!!
-नीरज



3 टिप्पणी:
आज के वक्त का एक भयानक सच
नारी की सुरक्षा को लेकर यह यक्ष प्रश्न ही लग रहा है....
जिसका उत्तर किसी के पास नहीं....
वीना जी उत्तर तो हम सबके पास है लेकिन शायद हम उस ओर देखना ही नहीं चाहते।
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