अपनी ही गर्मी से गरमाया हुआ....
चाय की चुस्कियों को थपकियाँ देता हुआ....
बाहर के कुहासे पर एक तिरछी सी निगाह डाली....
तो मन मानस जैसे सुन्न सा हो गया....
की क्या इस ठण्ड में फुटपाथ पर सिकुड़े हुए लोगों को बबल रैप में,
चाय की इस गर्मी का एहसास होता होगा....?
-नीरज
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