मंगलवार, 3 जनवरी 2012

सृजन


सृजन मन है, आत्मा है, एहसास है...
सृजन टिप्पणियां नहीं बल्कि आवेगों का संवाद है.
सृजन शूल नहीं...शूल से उत्पन्न वेदना है.
सृजन मन है, आत्मा है, एहसास है...
सृजन सृष्टि है...वर्षा है....
सृजन संताप है...हर्ष है....
खेतों में लहलहाती सरसों है....
मक्के की रोटी है सृजन....
अमीर और गरीब के बीच का फर्क है सृजन...
पैसा है...वासना है....फर्क है...कलम है सृजन....
सृजन रिश्तों की गर्माहट है....
कडकडाती ठंढ में दिनों बाद निकली धूप का मखमली एहसास है...
बरसात में छत से रिसता जल है सृजन...
गर्मी में मरु में फैली प्यास है सृजन...
मटके लेकर लम्बा सफ़र तय कर...
पानी लाने वाली औरत के ह्रदय में उठी संतुष्टि है सृजन...
बच्चे के खुश होने पर माँ की ममता है सृजन...
मांग पूरी करने के बाद पिता का स्नेह है सृजन....
सृजन मन है, आत्मा है, एहसास है...
सृजन टिप्पणियां नहीं बल्कि आवेगों का संवाद है...

-नीरज

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