वह रोज उसी रास्ते पर दिखता है,
मैले कुचैले कपडे,
फटी आस्तीन,
नाक से लगातार बहती,
गंगा जमुना,
एक कटोरा लिए,
आँखों में क़ातर याचना भरता,
भीख मांगता हुआ,
हाँ!! उस बच्चे को हम "भिखारी" ही कहते हैं!
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आज बैठा हुआ था,
उसी रास्ते पर,
अपने नवजात भाई को सीने से चिपकाये,
उसी क़ातर याचना से आते जाते,
सबको देख रहा था।
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आज वह खुश था,
कोई उसकी फोटो खींच गया,
अपने भाई को लिपटाये,
उसने कई पोज़ दिए,
बदले में मिला,
पचास का बड़ा नोट।
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खचाखच भरी उस गैलरी में,
आज एक फोटो बिकी,
लाखो डॉलर की,
फोटो एक भिखारी बच्चे की,
एक नवजात को लिपटाये हुए।
- नीरज

2 टिप्पणी:
बहुत ही मार्मिक प्रस्तुती। coments verification is not good.
अपने समाज का एक कटु सत्य
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