शनिवार, 19 अक्टूबर 2013

तुम्हारी यादें

ज दरीचे से सूरज नीचे उतर आया,
और रोशन हो गया वह कोना फिर से,
जहाँ तुम्हारी यादों को,
मैंने समेट कर रख छोड़ा था,
डर था मुझे,
इसीलिए कभी दरीचे पर नहीं गया,
ठंढ में भी,
जब सूरज गुनगुना रहता है।

-नीरज

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