Myself
-
I am a soaked torn paper Snatched from the book of life On which neither
you can write Anything fresh and bright Nor can read previous prints of
Love and s...
1 वर्ष पहले
Me and my thoughts © 2013
4 टिप्पणी:
कभी कभी जिंदगी में अजनान बन कर जीना जरुरी हो जाता है
लेकिन इस अनजानेपन में छूट जाते हैं कुछ पल, जिनका होना शायद बहुत जरुरी होता है।
दिनांक 17 /02/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
धन्यवाद!
-----------
पत्थर का गुण.....हलचल का रविवारीय विशेषांक.......रचनाकार संगीता स्वरूप जी
अनजान बने रह्कर भी बहुत कुछ समझ में आता है |
आशा
एक टिप्पणी भेजें